कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते बेरोजगार और पैसे-रोटी से मोहताज हो चुके प्रवासी मजदूर अपने घर लौट रहे हैं. इस बीच दो ऐसे शातिर पकड़े गए हैं, जो प्रवासी मजदूरों को घर छोड़ने के नाम पर ऐसा काम कर रहे थे जो किसी ने सोचा भी नहीं था.

दरअसल, इन लोगों ने प्रवासी मजदूरों को पंजाब से झारखंड भेजने के लिए ई-पास बनवाया और फिर ड्रग्स की सप्लाई करने लगे. सूचना मिलने पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शातिरों को गिरफ्तार कर लिया. दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर शिव कुमार और उनकी टीम ने इंटर स्टेट ड्रग्स रैकेट का खुलासा करते हुए दोनों शातिरों को गिरफ्तार कर लिया है, जो झारखंड के नक्सल इलाके हजारीबाग से अफीम पंजाब और दिल्ली में सप्लाई करते थे.
स्पेशल सेल ने शान मसीह और चेतन को गिरफ्तार किया है. दोनों पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले हैं. इनके पास से 12 किलो ऊंची क्वॉलिटी की अफीम बरामद हुई है, जिसकी कीमत 2 करोड़ है. ये लोग अफीम टोयटा कार में लेकर आ रहे थे. चौकाने वाली बात ये है कि इन ड्रग्स तस्करों ने लॉकडाउन में ड्रग्स की तस्करी के लिए पंजाब के होशियापुर के एसडीएम से प्रवासी मजदूरों को उनके घर झारखंड छोड़ने के लिए बकायदा ई-पास जारी करवा लिए थे. ये ई-पास को कार के आगे वाले शीशे पर लगा लेते थे, जिससे चेकिंग के दौरान इनसे ज्यादा पूछताछ न हो.
इसी ई-पास के सहारे ये तकरीबन तीन बार पंजाब से झारखंड गए और वहां से ड्रग्स लेकर पंजाब वापस आए. हालांकि, इस बार जब दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल को मुखबिर से जानकारी मिली तो कार को रोका गया. कार की तलाशी ली गई तो कार से ड्रग्स बरामद हुई.
बता दें कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए लगाये गए लॉकडाउन के चलते हजारों-हज़ार प्रवासियों का रोजगार छिन गया जिस कारण उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी. शहरों में जीवनयापन के लिए कोई इंतजाम न मिलने और घर वापसी के लिए कोई साधन न होने के बावजूद हजारों मजदूर पैदल ही सैकड़ों-हजारों की किलोमीटर दूर अपने घरों के लिए पैदल ही निकल पड़े. ऐसे में बहुत से लोग इन मजदूरों की मदद के लिए आगे आये.
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