
रायपुर / निगम के पास 100 सिटी बसें थी। इन बसों का संचालन बंगलुरू कर्नाटक की एक कंपनी को दिया गया था। एग्रीमेंट में एक शर्त रखी गई थी कि 10 साल तक बसों का संचालन करने के बाद सभी बसें संचालन करने वाली ऑपरेटर कंपनी को सौंप दी जाएगी। यानी बसों पर कंपनी का मालिकाना हक हो जाएग। अब यह सभी बसें जिनकी कीमत 5 करोड़ से भी ज्यादा है वो कंपनी को दी जा रही है। यह काम अक्टूबर तक हो जाएगा। इसके बाद मंत्रालय जाने वाले कर्मचारियों को दिक्कतें हो सकती हैं। यदि इसे ही जारी रखा गया, तो कंपनी यात्रा का किराया बढ़ाया बढ़ा सकती है।कंपनी को अक्टूबर में 100 में 99 सिटी बसें सौंप दी जाएंगी। 1 बस जल गई थी। इस वजह से कंपनी को 99 बसें मिलेंगी। अक्टूबर के बाद कंपनी के अधिकार में होगा कि वो मंत्रालय में अपनी बसें चलाए या न चलाए। ऐसे में एनआरडीए को मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए बसों की वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। कंपनी एनआरडीए के साथ एग्रीमेंट जारी रखती है तो उसे फिर भी फायदा है, लेकिन ज्यादा किराया वसूल करेगी।इधर दूसरी ओर 67 सिटी बसें चलाने के लिए तीन बस ऑपरेटरों के टेंडर कागजों में उलझ कर रह गए हैं। ऑपरेटरों के फाइनेंशियल बीड के दस्तावेजों की जांच की गई तो तीनों टेंडर में कागज पूरे नहीं मिले हैं। इसलिए फिलहाल इन सभी दस्तावेजों को निरस्त कर दिया गया है। लेकिन निगम प्रशासन ने इन ऑपरेटरों को थोड़ी राहत भी दे दी है। ट्रैवल्स के संचालकों को 10-10 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।अनुबंध की शर्तों में यह था कि सिटी बसों का संचालन लगातार और आम लोगों के लिए होना चाहिए। कंपनी ने आधी से ज्यादा बसें मंत्रालय में लगाई, क्योंकि एनआरडीए की ओर से ऑपरेटर को प्रति यात्री का किराया भुगतान होता था। मंत्रालय आने-जाने के अलावा दोपहर के खाली समय में सिटी बसों का संचालन शहर में होना था, लेकिन इस नियम को ताक पर रखा गया। ये बसें सिर्फ मंत्रालय तक ही सीमित रहीं।
इधर दूसरी ओर आमानाका डिपो में खड़ी 67 बसों को वहां से हटा दिया गया है। इन बसों को पंडरी और रांवाभाठा बस स्टैंड में शिफ्ट किया जा रहा है। दुर्गाम्बा कंपनी भी अपनी बसों को इधर-उधर शिफ्ट कर रही है। निगम अफसरों का कहना है कि 67 बसों पर जल्द फैसला होने वाला है। इसलिए बसों को जांच के लिए भी भेज रहे हैं।
कंपनी के खिलाफ कई शिकायतें हैं। एग्रीमेंट के हर एक शर्तों का अध्ययन किया जाएगा। फिलहाल उन्हें निगम की सिटी बसें नहीं सौंपी जाएंगी। -एजाज ढेबर, महापौर
जिन तीन बस ऑपरेटरों ने टेंडर भरा, उन्हें 10 दिनों के भीतर फिर से टेंडर जमा करने के लिए कहा गया है। बाकी बसों के एग्रीमेंट की जांच करेंगे। -मयंक चतुर्वेदी, कमिश्नर नगर निगम
निगम की 100 सिटी बसों का संचालन कर्नाटक की कंपनी को दिया गया था। 10 साल बाद इन बसों का मालिकाना हक कंपनी का हो जाएगा। -बद्री चंद्राकर, नोडल अफसर निगम