Thursday, September 21, 2023

सार्क फोरम के जर्नलिस्ट इंडिया चैप्टर के समिति मे की सूची मे छ.ग. से नाहिदा कुरैशी चयनित, अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में नेपाल, श्रीलंका व बांग्लादेश, भारत से 100 से ज्यादा पत्रकार व अध्येताओं की हुई उपस्तिथि दर्ज

सार्क फोरम जर्नलिस्ट इंडिया चैप्टर के समिति मे नये नामो की सूची मे छत्तीसगढ से नाहिदा कुरैशी चयनित,सभी राज्य से एक-एक पत्रकार नियुक्त

दक्षिण एशिया के पत्रकारों व अध्येताओं द्वारा भारत के वैश्विक नेतृत्व की जरूरत को रेखांकित किया गया

ग्रेटर नोएडा में आयोजित 10-11 जनवरी 2023 को जीबीयू और सार्क जर्नलिस्ट फोरम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सम्पन्न हुआ। सार्क जर्नलिस्ट फोरम (SRF) ने अफगानिस्तान में महिला पत्रकारों की दुःखद स्थिति के प्रति चिंता व्यक्त की। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय और सार्क जर्नलिस्ट फोरम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में फोरम के प्रतिनिधियों ने विचार व्यक्त करते हुवे कहा कि भारत को पूरे दक्षिण एशिया और विश्व भर के शांति स्थापना प्रयासों का नेतृत्व करना चाहिए।

इस संगोष्ठी में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के सौ से अधिक पत्रकार, विषय विशेषज्ञ और शोध अध्येता शामिल हुवे। कार्यक्रम की संकल्पना और आयोजन गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के प्रांगण में मानविकी संकाय के जनसंचार और मीडिया अध्ययन विभाग द्वारा किया गया। एसआरएफ के अध्यक्ष राजू लामा ने कहा कि सभ्यता का आरंभ भारत से हुआ और सनातन धर्म से हुआ। सनातन धर्म का विचार सभी विचारों में सर्वाधिक प्राचीन है। आज भारत विश्व के पांच प्रमुख समर्थ देशों में है। भारत, नेपाल, बांग्लादेश की उत्पत्ति समान है और एक है। 21 वीं सदी एशिया की सदी होगी। भारत को दक्षिण एशिया और पूरे विश्व में शांति और सद्भाव की स्थापना में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए। हम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णयों और विचारों को बहुत उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।

लामा ने अफगानिस्तान में महिला पत्रकारों की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में महिला न्यूज एंकर को बुर्का पहनकर समाचार पढ़ना पड़ता है। यह गंभीर विषय है, हमें इसका विरोध करना चाहिए।

संगोष्ठी के मुख्य संरक्षक और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रवींद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि राष्ट्र निर्माण एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। राष्ट्र निर्माण राष्ट्र के बारे में अवधारणा को अभिव्यक्त और स्पष्ट करने से शुरू होता है। पत्रकार राष्ट्र निर्माण में सहयोगी दर्शन, विचारों और भावनाओं को लोगों तक पहुंचाने में मदद करते हैं। जनमत बनाने में समर्थ मीडिया राष्ट्रनिर्माण के लिए बहुत उपयोगी है।

मानविकी और समाज विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की संरक्षक प्रोफेसर (डॉक्टर) बंदना पांडे ने कहा कि भारत एक भूखंड नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है। पत्रकारों को सत्यम शिवम सुंदरम की भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए जिससे सभी का हित हो।

मुख्य अतिथि भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम का उद्घोष भारत के मनीषियों ने प्राचीन काल से किया है। हमें ईश्वर ने मानवीय गुण दिए, ईश्वर का रास्ता एकता की ओर ले जाता है।

बता दें छत्तीसगढ़ प्रदेश से सार्क जर्नलिस्ट फोरम इंडिया चैप्टर के एक्सीक्यूट मेंबर व छत्तीसगढ़ डाइजेस्ट समाचार पत्र की मुख्य संपादक नाहिदा कुरैशी भी इस कार्यक्रम में सम्मलित हुई।

उन्होंने व देश विदेश से आए हुए पत्रकारो ने अपने-अपने पत्रकारिता अनुभव व विचार वहाँ यूनिवर्सिटी के छात्रों से महिलाओ को पत्रकारिता मे आने वाली चुनौतीयो के बारे मे सांझा किये। छात्रों द्वारा पत्रकारों से सवाल-जवाब का सेसन भी चला जिसमें श्रीमती नाहिदा कुरैशी से यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सवाल किया कि पत्रकारिता में सुंदरता का कितना महत्व है, जिस पर नाहिदा कुरैशी ने भी तर्क आधार जवाब दिए। इसी श्रेणी में नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका से आए हुए पत्रकारो ने अपने देश में पत्रकारों के साथ होने वाले व्यवहार को बताया।

कार्यक्रम मे शामिल अतिथियो का स्वागत और सम्मान किया गया, वहीं भारत के सार्क अध्‍यक्ष अनिरुद्ध सुधांशु ने इंडिया के पत्रकार और पत्रकार जगत से जुड़ी महिला पत्रकारों के साथ नेतृत्व किया और राष्ट्र निर्माण मैं पत्रकारिता की भूमिका को लेकर चर्चा किया गया ।

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