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छ.ग./ नए जिले मोहला-मानपुर में बेखौफ गड़बड़ी का मामला उजागर

महिला बाल विकास विभाग में नियम-कानून-कायदों की खुलेआम अवहेलना

रायपुर। प्रदेश के जिस नए जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में इन दिनों आंगनबाड़ी सुपरवाइजर हेमलता वर्मा के कारनामे के कारण पूरे प्रशासन को शर्मिंदा होने की नौबत आन पड़ी है । उसी जिले के मोहला परियोजना में ही गंभीर लापरवाही का एक और नमूना सामने आया है। मोहला में निवास करने वाली एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शारदा मंडावी की नियुक्ति परियोजना मुख्यालय से तकरीबन 25 किलोमीटर दूरस्थ जनजातीय ग्राम परवीडीह के आंगनबाड़ी केंद्र में की गई है, लेकिन वह आंगनबाड़ी न जाकर परियोजना मुख्यालय में ड्यूटी करती है।

उस आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का काम वहां की सहायिका सुकरो बाई और उसी गांव की मिनी आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता सम्हालती हैं। हैरानी की बात यह है कि ऐसा कई सालों से चल रहा है, लेकिन विभाग ने उस कार्यकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शारदा मंडावी अपने आंगनबाड़ी केंद्र ना जाकर परियोजना कार्यालय में पूरे समय रहती है, यह विभाग की जानकारी में ना हो, ऐसा असंभव है। जाहिर है, यह पूरा खेल विभाग के परियोजना स्तर के अधिकारियों के संरक्षण में ही चल रहा है।

सूत्रों का दावा है कि जिस अधिकारी के संरक्षण में गोटाटोला सेक्टर की सुपरवाइजर हेमलता वर्मा बेखौफ तरीके से कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रही है, उसी अधिकारी के रहम-ओ-करम पर यह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी निडर होकर नियम-कायदों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है।

राजधानी रायपुर से लगभग 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उस गांव में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यह रामगढ़ ग्राम पंचायत का आश्रित ग्राम है। रामगढ़ के अंतर्गत 5 गांव आते हैं, जिसमें से एक परवीडीह है। जिला मुख्यालय (मोहला) से यह लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फिलहाल कोई सुविधा नहीं है, यद्यपि हाल के दिनों में सड़कें ठीक हैं, पर अधिक बारिश हुईं तो छोटे-छोटे नालों के जलमग्न होने के कारण आवागमन अवरुद्ध हो जाता है।

शारदा मंडावी के आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका सुकरोबाई से जब इस शिकायत की सच्चाई जानने का प्रयास किया गया, तो उसने शुरू में यह कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शारदा मंडावी रोज आंगनबाड़ी केंद्र आती है, लेकिन जब उससे पूछा गया कि जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रोज आती है तो रिकॉर्ड अधूरा क्यों है.? इस सवाल का जवाब देते हुए सुकरोबाई ने बताया कि कभी आती है, तो कभी नहीं आती है। सप्ताह में कितने दिन आती है.? इस सवाल पर सुकरोबाई कभी 2-3 बोलती थी, तो कभी 4-5 बोलती रही। उसने स्पष्ट कहा कि यहां का काम एक अन्य कार्यकर्ता (मिनी आंगनबाड़ी) कर देती है। शारदा मंडावी को परियोजना ऑफिस में काम पड़ता है, इसलिए वह वहीं रुक जाती है। सहायिका सुकरोबाई ने बताया कि शारदा मोहला की रहने वाली है।

सहायिका सुकरोबाई के पति ने भी कहा कि शारदा मंडावी को सुपरवाइजर और बाबू लोग ऑफिस का काम देते हैं, इसलिए वह मोहला में ही रहकर काम करती है। उन्होंने कहा कि कोई जांच करने आयेगा तो ऑफिस के काम से मोहला जाना बता देने की बात भी शारदा मंडावी ने बता रखा है। उन्होंने बताया कि सुपरवाइजर भी आती है तो कोई आपत्ति नहीं करती, क्योंकि उसे मालूम है कि शारदा मंडावी परियोजना कार्यालय में बैठती है। सीधे बड़े अधिकारियों के साथ बैठकर काम करती है।

परवीडीह जनजातीय बाहुल्य गांव हैं। यहां के निवासी सहज और सरल हैं। उन्होंने सामान्य बातचीत में बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कभी-कभार गांव आती हैं, बाकी पूरे महीने मोहला में ही रहती है। यहां का काम सहायिका सुकरोबाई और मिनी आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता सम्हालती हैं, क्योंकि शारदा मंडावी परियोजना कार्यालय में बैठकर सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित करती है। यहां तक कि कभी-कभी वह सुपरवाइजरों पर भी हुकूमत चलाती है।

ग्राम पंचायत रामगढ़ के सरपंच अशोक मांझी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शारदा मंडावी की अनुपस्थिति की शिकायत पहले भी आई थी। जनपद अध्यक्ष दिनेश शाह मंडावी तक भी यह शिकायत पहुंची थी, तब सरपंच ने जाकर निरीक्षण किया था। उस निरीक्षण में शारदा मंडावी उपस्थित पाई गई थी। इसलिए ग्राम पंचायत ने उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन इस बार सरपंच ने कहा कि यदि दूरी की वजह से शारदा मंडावी डेली अप-डाउन नही कर सकती तो स्थानीय पात्र उम्मीदवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियुक्त करने का प्रस्ताव बनाया जाएगा और शारदा मंडावी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

शिकायत से तिलमिलाए सीडीपीओ और सुपरवाइजर

जानकारी मिली है कि गोटाटोला की सेक्टर सुपरवाइजर हेमलता वर्मा द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से मातृत्व अवकाश के एवज में एक माह के मानदेय की वसूली, मुख्यमंत्री सघन सुपोषण अभियान में कमीशन की मांग, बिना मोबाइल बांटे पोषण ट्रैकर एप्प में काम करने की अमानवीय दबाव, परियोजना अधिकारी को बताने के बावजूद सुपरवाइजर हेमलता पर कार्रवाई नहीं होने आदि की शिकायत दुर्ग संभाग आयुक्त तक पहुंचने के बाद हेमलता वर्मा को विभाग के अधिकारी बचाने में जुट गए। हेमलता वर्मा खुद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से मिलकर अपने पक्ष में बयान देने के लिए दबाव बनाने लगी। लेकिन पीड़ित कार्यकर्ताओं ने अंदरूनी हौसला बनाए रखते हुए पल-पल की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई। ऐसे में मजबूरन जांच कराना पड़ा। लेकिन जांच को भी प्रभावित करने में अधिकारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

कार्यकर्ताओं की मूल शिकायत में जो परियोजना अधिकारी खुद हेमलता वर्मा को संरक्षण देने का आरोपी है, उसे भी बयान लेने वाले तहसीलदार के साथ तैनात किया गया। हद तो यह कि तहसीलदार ने भी आपत्ति नहीं की। जांच के लिए 19 सितंबर को सेक्टर की कार्यकर्ताओं को मीटिंग के नाम पर बुलाया गया। परियोजना अधिकारी योगेश भगत ने पहले तो यह कहकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को झांसे में लेने की कोशिश की, कि जिस-जिस से हेमलता ने वसूली की है, उन्हें उनकी रकम वापसी करा दी जाएगी, बशर्तें वे अपना बयान बदल दें। आखिर में योगेश भगत ने सभी को मोबाइल बंद करने और पर्स के भीतर रख लेने कहा। फिर उसके बाद बयान हुआ। बयान में कुछ कार्यकर्ताओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी।

इसके बावजूद, हेमलता को 2 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगते हुए उसकी जगह वैकल्पिक रूप से दूसरी सुपरवाइजर शीला शर्मा को जिम्मेदारी दी गई है। हेमलता वर्मा को जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उसमे तारीख के लिए जगह खाली छोड़ दी गई है। इससे यह समझना मुश्किल होगा कि उसे दी गई 2 दिनों की मियाद कब से शुरू होकर कब खत्म होती है। यानी कुल मिलाकर हेमलता वर्मा और ऐसे लोगों को संरक्षण देकर बचाए रखने की कोशिशें आखिरी दम तक जारी है।

यह पूरा मामला संभाग आयुक्त से होते हुए राजधानी स्तर पर पहुंचने की कगार पर है लेकिन नए जिले की प्रशासनिक छवि पर कालिख पोतने वाले इस रैकेट पर कड़ी कार्रवाई करने की हिम्मत कोई नही कर रहा है। इधर, राजधानी के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बाद उम्मीद है कि जांच में निष्पक्षता आएगी, साथ ही जांच के सही बिंदु तय करके असली आरोपियों पर शिकंजा कसा जा सकेगा। तभी नए जिले के अस्तित्व में आने का लाभ इस नए जिले की जनता को महसूस होगी।

परियोजना अधिकारी योगेश भगत ने सुपरवाइजर हेमलता वर्मा को स्पष्टीकरण देने के लिए जो नोटिस जारी किया है, उसमें साफ दिख रहा है कि तारीख उल्लेखित नही है। इन सभी मामलों में परियोजना अधिकारी भगत की लिप्तता साफ दिख रही है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन समुचित कार्रवाई करने में नाकाम दिख रहा है, बल्कि पूरे मामले को बड़ी सफाई से दबाने की कोशिश की जा रही है। आगे चलकर यह स्थानीय प्रशासन के लिए बदनामी और किरकिरी का बड़ा कारण बनेगा, क्योंकि समय रहते कार्रवाई करने की बजाय सभी बचाव की मुद्रा में दिख रहे हैं।

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