राम मंदिर का शिलान्यास भारत के लिए गौरव, लेकिन… इन सवालों का जवाब कौन देगा ? – प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

Chhattisgarh Digest News Desk ; Edited by : Nahida Qureshi, Farhan Yunus.

राम मंदिर का शिलान्यास होना भारत के लिए गौरव का विषय है, लेकिन… इन सवालों का जवाब कौन देगा ? – प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से देश की समूची जनता को राम मंदिर के शिलान्यास पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कुछ प्रश्न भी किए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर तो एक ना एक दिन बनना ही था क्योंकि अयोध्या में जहां मंदिर था, वहां मंदिर ही बनेगा और इसमें कोई दो राय नहीं थी। लेकिन जिस प्रकार से आज सत्ता के मद में आकर कुछ लोग भारत का इतिहास बदलने में लगे हुए हैं, ठीक उसी प्रकार बाबर के जमाने में भी उसके सिपहसालार मीर बाक़ी ने तत्कालीन राम मंदिर की जगह बाबरी मस्जिद बनाने का काम किया था जिसके बाद एक लंबे समय बाद आज अब पुनः राम मंदिर की स्थापना की जा रही है। यह तो विधि का विधान है कि गलत, गलत ही होगा और सही और सत्य की कभी पराजित नहीं हो सकता है, हां परेशान जरूर हो सकता है।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्री राम का मंदिर बनना संपूर्ण विश्व के लिए गौरव का विषय है। खासकर भारत में तो सभी भारत वासियों की एक बहुत बड़ी मनोकामना कि आज पूर्ति हो रही है कि हम इस युग में राम मंदिर के निर्माण कार्यों को देख पा रहे हैं जो कि पुरातन काल में भी एक राम मंदिर ही था।

“लेकिन कुछ सवाल इसलिए पैदा हो रहे हैं क्योंकि भाजपा, मौजूदा मोदी सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कुछ हिंदू संगठनों द्वारा जिस प्रकार से राम मंदिर के नाम पर राजनीति की जा रही है और श्रेय लेने की कोशिश की जा रही है उसके कारण देश में एकता छिन्न-भिन्न हो रही है और ऊपर से यही लोग कहते हैं कि हम से माफ़ी मांगो, जैसे कि इन्होंने प्रभु श्री राम का कॉपीराइट रिज़र्व कराया हुआ हो।”

भाजपा की इसी संकुचित विचारधारा के कारण देश में आज नफ़रत का माहौल पैदा हो गया है। खासकर मोदी सरकार के आने के बाद से देश में एक दूसरों को धर्म के नाम पर लड़ाने की नापाक कोशिश की जा रही है जो कि कालांतर में इतिहास में काले अक्षरों में जरूर दर्ज होगा।

Prakash Punj Panday (File photo)

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि – देश की आज़ादी के बाद जिस प्रकार से जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिंदुत्व के मुद्दे को आधार बनाकर राजनीति की शुरुआत की, वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। लेकिन बाद में इस आंदोलन के जितने भी कर्णधार हुए, जैसे स्व. अशोक सिंघल, विनय कटियार, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, प्रवीण तोगड़िया, डॉ सुब्रमण्यम स्वामी, उमा भारती आदि, इनमें से किसी भी नेता को आज राम मंदिर के शिलान्यास में आमंत्रित नहीं किया गया है, यहां तक की शंकराचार्य को भी। इस चलाना समय नहीं बुलाया गया है इसका क्या कारण है। इसमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संघ प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए हैं। यह बात जनता को समझना होगा।

ज्ञात हो कि 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से धारा 370 हटाई गई थी और आज 5 अगस्त 2020 को बहुप्रतीक्षित राम मंदिर का शिलान्यास किया जा रहा है जो कि किसी भी शुभ मुहूर्त में नहीं किया जा रहा है। देव उठउनी अमावस्या तक हिंदू शास्त्रों के अनुसार कोई मुहूर्त नहीं है। लेकिन नोटबंदी और लॉकडाउन की ही तरह अपनी हठधर्मिता, अहंकार, दम्भ वश केवल सत्ता के कारण एक काल्पनिक इतिहास रचने की नापाक कोशिश जो संघ और मोदी सरकार द्वारा की जा रही है इसके कालांतर में जो दुष्परिणाम होंगे वह आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा याद रखेंगी। मीडिया का दुरुपयोग कर किस प्रकार से केवल गलत चीजें समाज में प्रचारित और प्रसारित की जा रही है और इसकी आड़ में देश को बेचा जा रहा है यह कदापि देश हित में नहीं है समझ हम सब रहे हैं लेकिन इसके ख़िलाफ आवाज़ कोई उठाना नहीं जा रहा है अब क्या मजबूरियां है यह तो देश के प्रत्येक नागरिक को ही समझना होगा नहीं तो राम तो महात्मा गांधी से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे जैसे और भी राजनेताओं के साथ ही देश के प्रदेश नागरिक के दिलों में हैं, लेकिन कुछ मुट्ठी भर लोग राम को अपनी बपौती या एकाधिकार समझने की भूल कर रहे हैं। इतिहास गवाह है कि इसके पूर्व भी तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी और पीवी नरसिंहाराव ने राम मंदिर की आधारशिला रखी थी लेकिन तत्कालीन सरकार और राजनेताओं ने कभी राजनीतिक फायदे के लिए उसे इस्तेमाल नहीं किया।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि प्रत्येक भारतवासी को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के चरित्र, व्यक्तित्व और विचारों का अनुसरण करते हुए उन्हें अपने दिल में बसाना है और उनके दिखाए हुए मार्गों पर चलना है ना कि उनके नाम पर पाखंड और आडंबर करते हुए राजनीति करना चाहिए।

इस लेख के ज़रिए मेरा मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना कतई नहीं है। मैं भी राम का उतना ही बड़ा भक्त हूं जितना कि सभी, लेकिन मेरा नज़रिया अलग है! प्रकाशपुन्ज पाण्डेय (राजनीतिक विश्लेषक, रायपुर छत्तीसगढ़)

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