Monday, December 5, 2022

आज़ ही के दिन 30 सितंबर को शहीद हुए विनय कुमार बीएसएफ की मां इंदिरा द्वारा 22 सालों से चली लम्बी लडाई के बाद मिली पैंशन – रणबीर सिंह

नई दिल्ली

आज़ ही के दिन 30 सितंबर को शहीद हुए विनय कुमार बीएसएफ की मां इंदिरा द्वारा 22 सालों से चली लम्बी लडाई के बाद मिली पैंशन रणबीर

प्राण न्यौछावर करने वाले बीएसएफ जवान विनय कुमार की मां श्रीमती इंदिरा मेनन को 22 सालों से लम्बी चली लड़ाई के इंतजार और पुर्व बीएसएफ इंस्पेक्टर राजेंदरन. टी.के द्वारा किए गए अथक प्रयासों के बाद सरकार से पेंशन मिली. याद रहे कि आज ही के दिन 30 सितंबर, 1996 जम्मू-कश्मीर के पुंछ मे 120 बटालियन बीएसएफ पोस्ट पर पाकिस्तानी हमले में विनय कुमार शहीद हुए थे। उस वक्त बीएसएफ द्वारा अपने बहादुर जवान विनय कुमार को दुश्मन के खिलाफ उनके वीरतापूर्ण जवाबी हमले के लिए रोल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया। शहीद की 75 वर्षीय बीमार विधवा मां पिछले 22 साल से बेटे की पेंशन के लिए संघर्ष कर रही थी आखिर कामयाबी तो हासिल हुई लेकिन शहीद के पिता पी.एन मेनन आज इस दुनिया में नहीं रहे जिनका पैंशन की बांट जोहते हुए 21 दिसम्बर 2011 में देहांत हो गया ।

याद रहे कि कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन जो कि पिछले 7 सालों से शहीद परिवारों के पैंशन, पुनर्वास एवं कल्याण संबंधित मुद्दों को बराबर सरकारों के संज्ञान में लाकर पत्र व्यवहार व विभिन्न मंचों के माध्यम से बात पहुंचाते रहे हैं।

रणबीर सिंह के कहे अनुसार शहीद विनय कुमार की शहादत के बाद उनकी 29 वर्षीय पत्नी को सरकार ने पेंशन जारी किया था लेकिन शहीद की पत्नी ने 25 जून 2000 में 23 साल की उम्र में दोबारा शादी कर ली ओर शहीद की पत्नी द्वारा दायर किए गए अपने हलफनामे में पैंशन को शहीद की मां इंदिरा मेनन के नाम पैंशन रिलीज करने की सत्यापित कॉपी संबंधित विभाग व बैंक को दी गई साथ ही इसकी सूचना शहीद विनय कुमार के पिता श्री. पी. एन. मेनन द्वारा बीएसएफ कार्यालय व संबंधित बैंक को दुबारा पैंशन जारी करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। बीएसएफ कार्यालय से मांगे गए सभी दस्तावेज समय समय पर भेजे गए लेकिन नतीजा निराशा ही हाथ लगी। 11 वर्षों से पैंशन की आस में लम्बी प्रतीक्षा के बाद, 21 दिसम्बर 2011 को शहीद के पिता का निधन हो गया। उसके बाद मां इंदिरा मेनन ने लिखित में अपने पति की मौत की सूचना दी और कुशल वकीलों के माध्यम से बीएसएफ अधिकारियों को आवेदन दिया कि उन्हें पेंशन दी जाए व मांगे गए सभी दस्तावेज स्पीड/पंजीकृत डाक से समय पर भेजे गए। वही दस्तावेज एक बार नहीं कई बार बीएसएफ के विभिन्न कार्यालयों द्वारा किए गए अनुरोध पर भेजे गए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।

निर्देशानुसार दिनांक 17/3/2016 को माननीय प्रधान मंत्री को क्रमस 9 मार्च, 9 जुन तथा 30/9/21 को PMO पेंशन शिकायत प्रकोष्ठ को आवेदन भेजे गए थे। माननीय पीएमओ कार्यालय से जवाब मिला कि सभी आवेदन प्राप्त हो गए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए बीएसएफ को भेज दिया गया है। क्या इतना ही काफी था काश माननीय प्रधानमंत्री जी कार्यालय द्वारा समय से संज्ञान लिया होता तो शहीद के पिता आज़ जिंदा होते।

कॉनफैडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन व विशेष रूप से केरला पेंशनर्स फोरम के अध्यक्ष राजेंदरन टी.के संयुक्त प्रयासों के कारण ही शहीद की मां को पैंशन चालू हो पाई। पैंशन रिलीज की लम्बी चली हक की लड़ाई में कॉनफैडरेसन चेयरमैन श्री एचआर सिंह पुर्व एडीजी सीआरपीएफ, महासचिव रणबीर सिंह, केरला कार्डिनेटर रिटायर्ड आईजी श्री एएम मौहम्मद, केरला पैंशन फोर्म महासचिव जार्ज सीवी और अधिवक्ता श्री के.जी सतीशन का विशेष सहयोग रहा जिनके द्वारा किए गए अथक प्रयासों से पैंशन चालू हो पाई।
आज ही के दिन 30 सितंबर 1996 को पाकिस्तानी गोलीबारी में शहीद हुए विनय कुमार की मां इंदिरा मेनन को पैंशन व बकाया भुगतान 22 सालों बाद मिलना शहीद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। देश को अपने सिपाही द्वारा दिए गए सर्वोत्तम बलिदान पर गर्व है लेकिन क्या ही अच्छा होता कि पैंशन रिलीज 22 साल पहले कर दी जाती जिसका कि शहीद परिवार पात्र था ओर इसी पैंशन मिलने की आस लगाए शहीद के पिता इस दुनिया से चल बसे।

रणबीर सिंह
महासचिव

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