Monday, December 5, 2022

छ॰ग॰/ राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच मतभेद की राजनीति के तहत विपक्ष का हल्ला

http://chhattisgarhdigest.in/…… Edited by : नाहिदा कुरैशी, फरहान युनूस…

रायपुर. राज्य सरकार की ओर से चार मंत्रियों रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, डॉ. शिव डहरिया और उमेश पटेल ने राज्यपाल से मुलाक़ात की थी।

बता दे कि भूपेश सरकार ने बजट सत्र में विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित कर कुलपति की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल से छीन लिया है। हालांकि राज्यपाल की मंजूरी के बिना यह विधेयक प्रभावी नहीं हुआ है। इसके अलावा कुछ और मुद्दों को लेकर चार मंत्री सरकार के प्रतिनिधि के रूप में गुरुवार को मिलने पहुंचे थे। मंत्रियों ने उन्हें सहमत करने की कोशिश की थी कि विधेयक में नया कुछ भी नहीं है। गुजरात, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में भी कुलपति की नियुक्ति का अधिकार राज्य शासन के पास है।

नियुक्तियां यहाँ अटकी हुई है :
राज्यपाल की मंजूरी नहीं होने के कारण अंबिकापुर विश्वविद्यालय, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय, उद्यानिकी विश्वविद्यालय और रायगढ़ में स्थापित नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति अटक गई है। इसके अलावा कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया भी अटक गई है। दरअसल, यह विवाद ठाकरे और सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति से ही शुरू हुआ था। इसके बाद सरकार ने राज्यपाल का अधिकार खत्म करने और ठाकरे विश्वविद्यालय का नाम बदलने की मंजूरी दी थी। इसे लेकर भाजपा ने भी राज्यपाल से मिलकर विरोध किया था।

राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच कुलपति नियुक्ति का अधिकार छीनने के मामले में ठन गई – सूत्र

राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय ये बना हुआ है कि राज्यपाल पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बात बनने के बजाय अब बिगड़ती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार खबर है कि राज्यपाल उइके ने विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने का फैसला किया है। इस वजह से विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति अटक गई है। राज्यपाल ने मंत्रियों को भी बताया था कि विधेयक के प्रावधानों को लेकर यूजीसी से अभिमत लिया जाएगा और फिर राष्ट्रपति को भेज सकती हैं। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नही हुई है।

सूत्रों के मुताबिक कुछ बिंदुओं पर उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से राज्यपाल को जवाब भेज दिया गया था। उन पर विचार करने के बाद उइके ने विधेयक पर राष्ट्रपति से अभिमत लेने का फैसला किया है।

वहीं विपक्ष की विगत 15 साल तक शासन पर रही भाजपा अब इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर हमला करती नजर आ रही है ।

राज्यपाल पर दबाव बनाना घोर असंवैधानिक आचरण : डॉ. रमन सिंह
इधर पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करने राज्यपाल पर दबाव बनाने की प्रदेश सरकार की कोशिशों को घोर अलोकतांत्रिक, असंसदीय और असंवैधानिक कहा है। इसकी निंदा करते हुए डॉ. रमन ने कहा कि सरकार की सारी शक्तियां खुद में केंद्रित करके सीएम बघेल जिस तरह का वन मैन शो चला और चलाना चाह रहे हैं, वह उनकी लोकतंत्र में गहरी अनास्था का परिचायक तो है ही, अब राज्यपाल के अधिकार छीनने की यह कोशिश उनके घोर असंवैधानिक आचरण का प्रदर्शन है।

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