Saturday, April 13, 2024

44 वंदे भारत ट्रेनों के लिए बोली लगाने वालों में एकमात्र विदेशी कंपनी चीन की

Chhattisgarh Digest News Desk :

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी सेमी हाई-स्पीड स्वदेशी ‘ट्रेन-18’ (वंदे भारत ट्रेन) परियोजना के लिए आमंत्रित वैश्विक निविदा में बोली लगाने वाली चीनी सरकार के स्वामित्व वाली सीआरआरसी कॉरपोरेशन इकलौती विदेशी कंपनी है.
अधिकारियों ने बीते शुक्रवार को बताया कि इसके लिए कुल छह कंपनियों ने अपनी बोलियां जमा कराई हैं.

44 वंदे भारत ट्रेनों के लिए बोली लगाने वालों में एकमात्र विदेशी कंपनी चीन की

खास बात ये है कि यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध चल रहा है और चीनी सैनिकों द्वारा हमला करने के कारण भारत के 20 जवान पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में शहीद हुए थे. भारतीय रेल ने यह निविदा 44 वंदेभारत ट्रेन की विद्युत कर्षण किट (इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन किट्स) या संचालक शक्ति सिस्टम (प्रोपल्शन सिस्टम) की खरीद के लिए जारी की थी.

भारतीय रेलवे द्वारा वंदे भारत परियोजना के लिए आमंत्रित वैश्विक निविदा में चीनी कंपनी सीआरआरसी कॉरपोरेशन ने गुरुग्राम की इसकी सहयोगी कंपनी के ज़रिये बोली लगाई है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने उसे इस प्रक्रिया में हिस्सा न लेने देने की मांग करते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है.

सीआरआरसी ने गुरुग्राम की सीआरआरसी पॉयनियर इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के जरिये बोली लगाई है. यह चीन की सरकार के स्वामित्व वाली सीआरआरसी कॉरपोरेशन लिमिटेड का संयुक्त उद्यम है.

इस परियोजना के लिए बोली लगाने वाली अन्य कंपनियों में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल), इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई की पॉवरनेटिक्स इक्विमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और हैदराबाद की मेधा ग्रुप शामिल है.

अधिकारियों ने जानकारी दी कि पिछले साल पेश हुई पहली ट्रेन-18 पर 100 करोड़ रुपये व्यय किए गए, जिसमें से 35 करोड़ रुपये सिर्फ संचालक शक्ति सिस्टम पर खर्च हुए.
मौजूदा निविदा इस तरह की 44 किट के लिए है जिसका मूल्य करीब 1,500 करोड़ रुपये है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने कहा, ‘हमें ट्रेन सेट के लिए छह कंपनियों की ओर से बोलियां मिली हैं.’

यह निविदा भारतीय रेल की चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) ने पिछले साल 22 दिसंबर 2019 को जारी की थी. इसे शुक्रवार को खोला गया.

इन ट्रेनों के लिए यह इस तरह की तीसरी निविदा है. यह निविदा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत ट्रेन-18 के विभिन्न उपकरण, कोच इत्यादि की खरीद के लिए निकाली गई है.

उल्लेखनीय बात यह है कि ट्रेन निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी बॉम्बारडियर, एल्स्टॉम, सीमेंस, सीएएफ, टैल्गो और मित्शुबिशी ने इस निविदा में हिस्सा नहीं लिया.

सीमा गतिरोध के बाद भारतीय रेल ने 417 किमी लंबी कानपुर-दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) के लिए चीनी कंपनी को दिए गए 417 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया था.

वहीं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने सरकार से मांग की है कि इस निविदा में चीनी कंपनी सीआरआरसी को भाग नहीं लेने दिया जाए. कैट ने शनिवार को इस बारे में रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है.

सीएआईटी ने कहा है कि भारतीय रेलवे की यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के आह्वान का एक हिस्सा है, इसलिए इस तथ्य और वर्तमान में चल रही परिस्थितियों को देखते हुए चीनी कंपनी को इस परियोजना में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. पत्र में कहा गया है कि रेल मंत्रालय को इस परियोजना के लिए भारतीय कंपनियों पर ही जोर देना चाहिए.

Related Articles

Stay Connected

22,042FansLike
3,909FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles