Saturday, March 2, 2024

आइए जानें दुनिया सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले व्यक्तित्व को।।

हे राष्ट्रपिता तुम्हें कोटि-कोटि नमन..

हे राम🙏

पुण्यतिथि पर विशेष:-

आइए जानें दुनिया सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले व्यक्तित्व को।।

सन 1914 में जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट कर आए। तो देशवासियों ने द.अफ्रीका में किये गए उनके कार्यों को ध्यान में रखकर उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें महात्मा नाम से पुकारना शुरू कर दिया।

उन्होंने अगले चार साल तक भारतीय स्थिति का अध्ययन करने तथा उन लोगों को तैयार करने में बिताए जो सत्याग्रह के द्वारा भारत में प्रचलित सामाजिक व राजनीतिक बुराइयों को हटाने में उनका साथ दे सकें।

फरवरी 1919 में अंग्रेजों के बनाए गए रॉलेट एक्ट कानून पर, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए जेल भेजने का प्रावधान था, उन्होंने अंग्रेजों का जमकर विरोध किया। यही से गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा कर दी। इसके परिणामस्वरूप एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया, जिसने 1919 के बसंत में समूचे उपमहाद्वीप को झकझोर कर दिया।

इस सफलता से प्रेरणा लेकर महात्‍मा गांधी ने भारतीय स्‍वतंत्रता के लिए किए जाने वाले अन्‍य अभियानों में सत्‍याग्रह और अहिंसा के विरोध जारी रखे,जैसे कि ‘असहयोग आंदोलन’, ‘नागरिक अवज्ञा आंदोलन’, ‘दांडी नमक यात्रा’,”विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार” तथा’भारत छोड़ो आंदोलन’। गांधी जी के इन सारे प्रयासों में पूरा देश उनके साथ आ खड़ा हुआ। यही वजह थी कि तब दुनिया के तमाम साम्रराज्य वादी ताकतों के आगे निहत्था और कृष काय व्यक्ति सीना ताने खड़ा था। ये अहिंसा और सत्याग्रह की ही ताकत थी कि बात-बात लोगों को सरेआम गोली मारने वाली अग्रेजी हुकूमत गांधी बाबा के मुंह से निकले शब्दो से डरती थी।

अंतत: भारत को 15 अगस्‍त 1947 को स्‍वतंत्रता मिल गई। ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी महात्मा गांधी की 30 जनवरी,1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में आजाद भारत के पहले आतंकी नाथूराम गोडसे के द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई।

अपने जीवन काल मे महात्मा गांधी जी के द्वारा कुछ महत्वपूर्ण किताबे भी लिखी गईं इन पुस्तकों के नाम-

1हिन्द स्वराज
2मेरे सपनों का भारत
3“दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह”
4ग्राम स्वराज
5सच्चाई भगवान है
6प्रकृति इलाज
7पंचायत राज भगवान के लिए मार्ग 8हिंदू धर्म का सार
9कानून और वकील
10गीता का संदेश
11सांप्रदायिक सद्भावना का रास्ता

गांधी जी की लिखी पहली पुस्तक “हिन्द स्वराज’ को अंग्रेजों ने भारत में प्रतिबंधित कर दिया था। महात्मा गांधी ने हिन्द स्वराज को साल 1909 में लिखा जब भारत में ब्रिटिश शासनकाल खत्म हो रहा था। दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह पुस्तक महात्मा गांधी के द्धारा लिखी गई प्रिय पुस्तकों में एक हैं।

बताया जाता है कि उनकी हत्या के बाद भी इतिहास के पन्नो में अब तक के सबसे बड़े विराट वैश्विक व्यक्तित्व के रूप में महात्मा गांधी जाने जाते है। उन पर देश-विदेश में करीब 10 हजार से अधिक किताबें और लेख और शोध अध्यन विभिन्न लेखकों/छात्रों ने अलग-अलग भाषाओं में लिखी है। इतना ही नही यह भी जानना आवश्यक है कि महात्मा गांधी एक मात्र ऐसे विरले भारतीय व्यक्ति रहे है जिन पर पूरी दुनिया मे सबसे अधिक शोध छात्रों ने अध्यन किया है और आज भी कर रहे हैं। महात्मा पर अध्ययन करने वाले छात्रों की संख्या लाखों में बताई जाती है। उनकी मृत्यु के 75 साल बाद आज भी हजारों की संख्या देशी-विदेशी छात्र-छात्राएं उन पर अध्ययन करने में रुचि रखते हैं।

वहीं गांधी जी से प्रेरित होकर देश में 20 से अधिक महान राष्ट्र नायकों ने आजादी के संघर्ष के साथ-साथ अपने जीवन काल में देश की महान सेवा की। जिनमें उन्हें अपने पहले रेडियो सन्देश में राष्ट्रपिता कहने वाले महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस,प. जवाहर लाल नेहरू,सरदार वल्लभ भाई पटेल,अमर शहीद भगत सिंह,लालबहादुर शास्त्री,खान अब्दुल गफार खान से लेकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेद्र प्रसाद,डा.जाकिर हुसैन,फ़कीरुद्दीन अली अहमद व अन्य शामिल हैं।

आइये शहीद दिवस के 30 जनवरी के दिन हम ऐसे विराट व्यक्तित्व को नमन करें,जिनके सम्मान में न सिर्फ भारत में,बल्कि दुनिया के 84 देशों में 110 से अधिक मूर्तियां लगाई गई हैं। वही 300 से अधिक अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में गांधी जी के जीवन शैली पर शोध की शिक्षा दी जाती है.

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार महात्मा गांधी बापू ऐसे विरले महापुरुष हैं,जिनकी पाकिस्तान,चीन, ब्रिटेन,अमेरिका और जर्मनी से लेकर अनेक अफ्रीकी देशों, रूस और कम्युनिस्ट देश चीन,स्पेन,सहित इराक,इंडोनेशिया, फ्रांस,मिस्र, फिजी, इथोपिया,घाना, गुयाना, हंगरी, जापान, बेलारूस, बेल्जियम, कोलंबिया, कुवैत, नेपाल, मालावी, न्यूजीलैंड, पोलैंड,दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, सर्बिया, मलेशिया, यूएई, युगांडा, पेरू, तुर्कमेनिस्तान, कतर, वियतनाम, सऊदी अरब, स्पेन, सूडान, तंजानिया जैसे देशों में भी महात्मा गांधी की मूर्तियां स्थापित हैं।

राष्ट्रपिता को पुनः कोटि-कोटि नमन के साथ

🙏

मुझे गर्व है कि मैं भी गांधीवादी हू

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