Saturday, March 2, 2024

बीजेपी के लोग उतर आय सड़क पर और पढ़ा हनुमान चालीसा|

शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हनुमान चालीसा पढ़ते दिखाई दिए। दरअसल भक्ति की शक्ति के साथ भाजपा सियासी तौर पर कांग्रेस का विरोध कर रही थी। इसी तर्ज पर रायपुर के बूढ़ेश्वर मंदिर के पास हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम किया गया। पूर्व मंत्री और रायपुर से भाजपा के विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने भी हिस्सा लिया और कांग्रेस के लोगों को राक्षस बताया।

बृजमोहन अग्रवाल ने मीडिया से कहा- कांग्रेसी राक्षस के रूप में काम कर रहे हैं। ताड़का, पूतना, कालनेमी जैसे राक्षसों के रूप में काम कर रहे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता सनातन की रक्षा करते हैं। बजरंग बली और बजरंगियों का अपमान करने वालों को ठिकाने लगाने के लिए हमने हनुमान चालीसा का पाठ किया है।

सारा विवाद मुख्यमंत्री के एक बयान से जुड़ा है। केरल में कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का जिक्र था। भूपेश बघेल ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो छत्तीसगढ़ में भी बजरंग दल पर कार्रवाई करेंगे। इसके बाद बजरंग दल के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। भाजपा भी फ्रंट पर आ गई। गुरुवार को कांग्रेस ने भाजपा की सद्बुद्धि के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया था।

नक्सलियों को संभालें
बृजमोहन ने कहा कि प्रदेश की सरकार बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की चिंता छोड़, नक्सलियों को नियंत्रित कर लें। यहां की कानून व्यवस्था, माफियाओं को संभाल लें। रही बात बजरंग दल की तो बजरंगी हनुमान जी के भक्त हैं। सनातन धर्म के रक्षक और सेवक है। हनुमान जी पर प्रतिबंध लगाने की जुर्रत न करें।

हनुमान चालीसा पाठ में जिला भाजपा अध्यक्ष जयंती भाई पटेल, भाजपा प्रवक्ता अमित साहू, रमेश सिंह ठाकुर, पुरानी बस्ती मंडल अध्यक्ष सालिक सिंह ठाकुर, सदर बाजार मंडल अध्यक्ष प्रवीण देवड़ा, सिविल लाइन मंडल अध्यक्ष मुकेश पंजवानी, उपनेता प्रतिपक्ष मनोज वर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

क्या कहा कांग्रेस ने
कांग्रेस नेता धनंजय ठाकुर ने शुक्रवार को भाजपा के चालीसा पाठ पर कहा- हनुमान चालीसा पढ़ने से भाजपा के नेताओं के मन में नफरत के भाव जो हैं उसका नाश होगा । बजरंग दल पर बैन नहीं लगा है। भाजपा के नेता बताएं कि कर्नाटक और गोवा की उनकी सरकार ने श्री राम सेना पर बैन क्यों लगाया था। भाजपा का दोहरा चरित्र देश की जनता देख रही है। ध्यान भटकाने के लिए ये सब हथकंडे अपना रही है।

बजरंग दल से सियासी बयान बजरंग बली तक पहुंचे
बीते दो दिनों में भाजपा और कांग्रेस के बीच बजरंग दल का विवाद भगवान बजरंग बली तक पहुंचा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस ने कर्नाटक में बजरंग दल पर बैन लगाने की बात कहकर और बजरंग दल की तुलना पीएफआई से करके अपने बहुसंख्यक विरोधी चेहरे को उजागर कर दिया है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा- कांग्रेस के नेता अपने विधायक बृहस्पत सिंह को समझाना चाहिए, जिसने बैंककर्मी को थप्पड़ मारा था, उन कांग्रेसियों को समझाना चाहिए, जिन्होंने जगदलपुर में थाने में घुसकर कल एक आईपीएस का कॉलर पकड़कर हाथापाई की। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ‘बजरंग दल को ठीक कर देंगे’ संबंधी बयान को आपत्तिजनक माना और कहा कि कालनेमि भी बजरंगबली को ठीक करने निकला था; उसकी क्या गति हुई, यह दुनिया जानती है। साव ने कहा कि बजरंग दल बजरंग बली की तरह चिरंजीवी रहेगा।

बजरंग दल विवाद पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा- बजरंग दल की तुलना बजरंग बली से करना भगवान का अपमान है। बजरंग दल भगवान बजरंग बली नहीं है। खुद अटल बिहारी वाजपेयी ने बजरंग दल की कार्यप्रणाली पर शर्मिंदगी जताई थी। यह संगठन संपूर्ण हिन्दू समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता है और न ही यह संगठन बजरंग दल नाम होने मात्र से हनुमान जी हो नहीं जाता है। किसी भी संगठन को हिन्दुओं के आराध्य से तुलना किया जाना गलत और अस्वीकार्य है।

भाजपा को बजरंग दल पर प्रतिबंध से आपत्ति है तो बजरंग दल पर प्रतिबंध का राजनैतिक विरोध करें लेकिन उसका पैरोकार करते करते उसकी तुलना भगवान से किया जायेगा तो इसकी आलोचना की जाएगी। सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बजरंग दल की कार्यप्रणाली शुरू से संदिग्ध रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि बजरंग दल ने हमेशा से केवल शर्मिंदा किया है। उन्होंने आरएसएस से बजरंग दल पर लगाम लगाने का आग्रह किया था। हिंदू महासभा ने कट्टर पंथियों की तरह हिंसक तरीके अपनाने पर बजरंग दल की आलोचना की थी। 2003 में भरपानी में बम विस्फोट में बजरंग दल की संलिप्तता उजागर हुई। सितंबर 2008 में कर्नाटक में हुए दंगों में बजरंग दल शामिल रहा। ऐसे दल का भगवान बजरंग बली से कोई संबंध नहीं हो सकता।

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